जब बात स्वदेसी अपनाने की है तो सोशल मीडिया प्लेटफार्म क्यों स्वदेसी न हो |

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“जन जन का ये नारा है, अब से सिर्फ स्वदेशी अपनाना है|” जब बात स्वदेसी अपनाने की है तो सोशल मीडिया प्लेटफार्म क्यों स्वदेसी न हो |

सुबह होते ही हाथो में फ़ोन होता है और रात को सोने से पहले भी।  फेसबुक, Whats app, इंस्टाग्राम , लिंक्डइन , snap chat या कोई गेमिंग ऍप्स इनमे से किसी न किसी सोशल मीडिया का प्लेटफार्म का प्रयोग आप करते ही होंगे। आज सोशल मीडिया (Social Media) का हमारे जीवन से बहुत अधिक जुड़ाव हो चुका हैं चाहें बच्चे हो या बूढ़े हो, चाहें आम नागरिक हो या फ़िर फेमस हस्तियां आज सब सोशल मीडिया (Social Media) पर उपस्थित रहतें हैं बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सभी की लाइफ का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चूका है।

अक्सर कोई न कोई फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होता ही रहता है।   कई लोग सोशल मीडिया के जरिये रातो रात सुपरस्टार बन चुके है।   नि:संदेह सोशल मीडिया का सभी की जिंदगी में बहुत महत्त्व है। सोशल मीडिया के बहुत से फायदे है तो नुकसान भी है , इन्ही नुकसान को रोकने के लिए भारत सरकार ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए है। जिनके चलते पिछले साल कई चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। ट्विटर भी कई दिनों से खबरों में बना रहा है। सरकार के नए नियमो के आने या उनका ठीक तरह से पालन न होने पर ये ऍप्स कभी भी बैन किया जा सकते है।  इनमे से अधिकतर सोशल मीडिया प्लेटफार्म विदेशी है।

 

अगर ये सोशल मीडिया प्लेटफार्म बैन हो जाते है तो क्या हमारे पास इनका कोई विकल्प है

जी है , हमारे पास कुछ देसी ऍप्स है जो की इनका विकल्प है और हमारे कई केंद्रीय मंत्रियों,सरकारी विभागों और कई जानी- पहचानी हस्तियों ने इन देसी सोशल मीडिया को अपनाया भी है और इनकी सिफारिश भी की है।  हम यहां आपको बता रहे हैं कि ट्विटर, व्हाट्सएप, फेसबुक और क्लब हाउस जैसे विदेशी प्लेटफॉर्म के लिए भारतीय विकल्प क्या हो सकते हैं? इन स्वदेशी ऐप्स के सामने क्या चुनौतियाँ हैं? क्या इस समय विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को छोड़कर स्वदेशी ऐप्स से जुड़ना यूजर्स के लिए फायदे का सौदा है?

 

 सबसे पहले बात करेंगे ट्विटर के देसी विकल्प कू (koo)ऐप्प की

कू (koo)

कू ट्विटर जैसे एक माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म है, जहां उपयोगकर्ता सार्वजनिक रूप से राय पोस्ट कर सकते हैं और अन्य उपयोगकर्ताओं का भी अनुसरण कर सकते हैं। उपयोगकर्ता 400 शब्दों तक का टेक्स्ट आधारित Koos, मल्टीमीडिया कंटेंट पोस्ट कर सकते हैं और दूसरों के साथ व्यक्तिगत रूप से चैट कर सकते हैं। उपयोगकर्ता उल्लेख के लिए हैशटैग (#) या “@” प्रतीक का भी उपयोग कर सकते हैं। यह “री-कू” फीचर के साथ आता है, कू के रीट्वीट का संस्करण। कू की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें अंग्रेजी के अलावा छह भारतीय भाषाओं का सपोर्ट आता है।

क्या कू (Koo) ऐप  ट्विटर (Twitter) का भारतीय विकल्प बन सकता है?

मार्च 2020 में, अपरामय्या और मयंक ने कू (Koo) ऐप लॉन्च किया। पिछले 14 महीनों में इस ऐप ने करीब 250 करोड़ रुपए की फंडिंग जुटाई है।

Play Store पर कू (Koo)  ऐप के करीब 60 लाख डाउनलोड हो चुके हैं। ट्विटर और सरकार के बीच हुए विवाद के बीच जनवरी में  कू (Koo)  ऐप को 30 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया गया था।

कू (Koo) ऐप आत्मनिर्भर भारत चैलेंज का भी विजेता है।

 

  • केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, पीयूष गोयल समेत कई नेता, अनुपम खेर एवं कंगना रनौत समेत कई हस्तियां कू (Koo)  एप से जुड़ चुके हैं। नेताओं ने देश की जनता से भी इस देसी ऐप का इस्तेमाल करने की अपील की |
  • कू (Koo)  ऐप में निवेश करने वाली कंपनी 3one4 कैपिटल के फाउंडिंग पार्टनर सिद्धार्थ पई के मुताबिक, ‘भारतीय स्टार्टअप सही समय का इंतजार कर रहे थे। कम लागत वाला डेटा, स्मार्टफोन का बढ़ता चलन और आत्मनिर्भर भारत की भावना, कू (Koo)  जैसे स्वदेशी ऐप के लिए एकदम सही साबित हुई है।
  • कू (Koo)  के अतिरिक्त टुटर (Tooter), मित्रसेतु (Mitrasetu) , चित्तर (Chittr) एवं हंग्री ट्रिपर (Hungry Tripper) भी ट्विटर के अच्छे विकल्प है ये सब स्वदेसी भी है|

संदेश (Sandesh) ऐप :

संदेश भारत सरकार का इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप है, अब सभी के लिए उपलब्ध है। पहले, यह केवल सरकारी अधिकारियों के लिए उपलब्ध था। ऐप, जिसे राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) द्वारा लॉन्च किया गया है, पीएम नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया और आत्मानिर्भर भारत (आत्मनिर्भर भारत) पहल को बढ़ावा देता है।

 

संदेश (Sandesh)  ऐप व्हाट्सएप का भारतीय विकल्प बन सकता है?

  • संदेश व्हाट्सएप को टक्कर देने के लिए भारत सरकार का एक इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप है। जिसे राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र ने बनाया है।
  • मेसेज के ज्यादातर फीचर व्हाट्सएप से मिलते-जुलते हैं, लेकिन कुछ अंतर भी हैं। उदाहरण के लिए WhatsApp में केवल मोबाइल नंबर के जरिए ही अकाउंट बनाया जा सकता है, जबकि मैसेज में ई-मेल और मोबाइल नंबर दोनों का विकल्प होता है।
  • मैसेजिंग ऐप के प्ले स्टोर पर 50 हजार से ज्यादा डाउनलोड हैं। शुरुआत में यह ऐप सरकारी अधिकारियों के इस्तेमाल के लिए था, लेकिन बाद में इसे सभी के लिए उपलब्ध करा दिया गया।
  • सैंड्स द्वारा पेश किए जाने वाले अधिकांश फीचर सेट, जो हम व्हाट्सएप, टेलीग्राम पर उपयोग कर रहे हैं। उपयोगकर्ता अपने दोस्तों, परिवार से बात कर सकते हैं और एक दूसरे के साथ चित्र, वीडियो, GIF और बहुत कुछ साझा कर सकते हैं।इसके अलावा, ऐप को डिजिलॉकर के साथ भी एकीकृत किया गया है जो सैंड्स में प्राप्त किसी भी पीडीएफ फाइल को संग्रहीत करने में सक्षम है।

संदेस एप्लीकेशन को कैसे  download करें

संदेश को आप अपने मोबाइल फ़ोन या कंप्यूटर पर Use कर सकते है अगर आप Mobile पर इस्तेमाल करना चाहते है तो सबसे पहले आपको इसका APK Download करना होगा

  1. सबसे पहले इस लिंक पर जाएँhttps://www.gims.gov.in/dash/dlink
  2. यहाँ आपको Android और iOS दोनों file मिल जायेगें
  3. संदेस एप्लीकेशन को download करें
  4. पहली बार sing-up करने के लिएMobile No. या Email ID डाले
  5. और फिर प्राप्त OTP द्वारा Verify करें
  6. उसके बाद अपना नाम जेंडर और बेसिक जानकारी भरें
  7. term and condition accept करे।

कंप्यूटर या लैपटॉप पर Use करने के लिए आपको इसकी official website पर जायेगें तो वहाँ आपको Sandes app लॉग इन करने के तीन विकल्प मिलते हैं जो निम्नलिखित हैं:-

  1. SIGN IN – LDAP
  2. SIGN IN – SANDES OTP
  3. SANDES WEB

 

ShareChat शेयर चैट

ShareChat App एक Video Status App के रूप में जाना जाता है यह एक काफी पॉपुलर वीडियो स्टेटस ऐप्प है जिसका निर्माण आईआईटी कानपुर के छात्रों ने मिलकर किया है शेयर चैट ऐप्प को 2015 में लांच कर किया गया था जिसे आज लाखों-करोड़ों लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है।

ShareChat में आपको वीडियो, ऑडियो और मैसेजेस देखने को मिलते हैं और आप इनको अपने किसी भी मित्र या फैमिली मेंमबर के साथ शेयर कर सकते हैं साथ ही आप अपना अकाउंट बनाकर पोस्ट शेयर कर सकते हैं और किसी दूसरे के अकाउंट को भी फॉलो कर सकते हैं।

 

क्या शेयरचैट फेसबुक का भारतीय विकल्प बन सकता है?

  • शेयर चैट ने अब तक कुल 5 हजार करोड़ से ज्यादा की फंडिंग जुटाई है। इससे इस स्वदेशी सोशल नेटवर्क का मूल्यांकन 15 हजार करोड़ से अधिक हो गया है।

 

  • शेयर चैट के मंथली एक्टिव यूजर्स 160 मिलियन हो गए हैं। इसने 2020 में एक लघु वीडियो प्रारूप ऐप Moz लॉन्च किया, जिसके केवल 9 महीनों में 120 मिलियन मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता हैं।

 

  •  यह 15 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है। इनमें हिंदी, मलयालम, गुजराती, मराठी, पंजाबी, तेलुगु, तमिल, बंगाली, उड़िया, कन्नड़, असमिया, हरियाणवी, राजस्थानी, भोजपुरी और उर्दू जैसी भाषाएं शामिल हैं।

लहर (Lehar )

लहर एक ऑडियो-वीडियो चर्चा मंच है। इसे 2018 में अतुल जाजू और विकास मालपानी ने लॉन्च किया था। यह एंड्रॉइड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।

लहर की चर्चा में अधिकतम 16 लोग भाग ले सकते हैं। क्लब हाउस की तरह इसे भी इनवाइट के बाद ही इस्तेमाल किया जा सकता है।

आपको अपनी चर्चा के लिए एक विषय लिखना होगा और व्यापक पहुंच के लिए कुछ संबंधित टैग जोड़ सकते हैं। आप फ़ोटो या अपने चर्चा आमंत्रण में एक लिंक भी जोड़ सकते हैं। इसके अतिरिक्त, लेहर आपको भविष्य के समय के लिए अपनी चर्चाओं को शेड्यूल करने देता है। आप प्रतिभागियों को अपनी चर्चाओं में आमंत्रित भी कर सकते हैं।

क्या लेहर “क्लब हाउस” का भारतीय विकल्प बन सकता है?

  • कुछ भारतीय उद्यमियों ने लहर को लेकर ट्वीट करना शुरू कर दिया है। यह वैश्विक ऐप्स के लिए भारतीय विकल्प खोजने में बढ़ती रुचि के कारण हो सकता है। क्लब हाउस के विपरीत, लेहर में ज्यादातर भारतीय उपयोगकर्ता हैं।
  • दिसंबर 2020 तक इस ऐप के 1.5 लाख से ज्यादा डाउनलोड हो चुके हैं। इसे अब तक 4.41 करोड़ रुपये की फंडिंग मिल चुकी है। साथ ही लेखन के समय 5 में से 4.3 स्टार औसत रेटिंग है।

अब सवाल यह उठता है कि क्या देसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़ने का यह सही समय है?

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि इस तरह के ऐप्स के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं- नेटवर्क इफेक्ट और कैपिटल।

  1. नेटवर्क प्रभाव: आप वहां क्यों जाते हैं जहां आपके मित्र नहीं हैं

 

मान लीजिए आपके 10 दोस्तों में से 8 लोग इंस्टाग्राम पर हैं और 2 लोग शेयरचैट पर हैं। इस बात की अधिक संभावना है कि आप भी अधिक समय इंस्टाग्राम पर ही बिताना चाहेंगे। इसे नेटवर्क इफेक्ट कहते हैं।

 

भारतीय सोशल मीडिया ऐप्स के लिए पहली चुनौती यह है कि वे अमेरिकी कंपनियों के नेटवर्क प्रभाव का मुकाबला कैसे कर पाएंगे?

ट्विटर और स्नैपचैट के पूर्व कार्यकारी राहुल खुर्शीद कहते हैं, “अगर कोई सेलिब्रिटी घरेलू सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जाता है, तो उनके प्रशंसक भी वहां पहुंच जाएंगे, लेकिन यहां सवाल यह है कि एलोन मस्क koo में क्यों शामिल होंगे?”

 

 

  1. पूंजी: लंबी अवधि के निवेश के बाद की कमाई

 

  • सोशल मीडिया व्यवसाय के विकास और फलने-फूलने में पूंजी की कमी सबसे बड़ी बाधा है। ट्विटर ने अपनी लॉन्चिंग के चार साल में 7 हजार करोड़ से ज्यादा की फंडिंग जुटाई थी। इसके बाद कंपनी को मुनाफे में आने में और सात साल लग गए। इंस्टाग्राम ने भी अपने पहले दो साल में करीब 4 हजार करोड़ रुपए जुटाए थे। इसके बाद फेसबुक ने इसे हासिल कर लिया।
  • स्वदेशी सोशल मीडिया ऐप्स का मुद्रीकरण भी निवेशकों के लिए एक बड़ी चुनौती है।

 

  •  फेसबुक और गूगल की तरह, भारत में डिजिटल विज्ञापन बाजार में उनका 85% हिस्सा है। लेकिन अगर भारत के प्रति यूजर रेवेन्यू की बात करें तो यह अमेरिका और यूरोप के मुकाबले काफी कम है।

 

फेसबुक का ही उदाहरण लें। फेसबुक अमेरिका में एक यूजर से 1444 रुपये प्रति तिमाही, यूरोप में 437 रुपये और भारत जैसे देश में सिर्फ 153 रुपये कमाता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


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